उत्तराखंड में दस्तावेज पंजीकरण ऑनलाइन करने का विरोध तेज, रोजगार पर संकट की आशंका ।

उत्तराखंड में दस्तावेज पंजीकरण ऑनलाइन करने का विरोध तेज, रोजगार पर संकट की आशंका

देहरादून। उत्तराखंड में दस्तावेजों के पंजीकरण की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के प्रस्ताव का विरोध तेज हो गया है। अधिवक्ताओं और इस कार्य से जुड़े लोगों ने इसे आजीविका पर सीधा असर डालने वाला कदम बताया है। इस संबंध में मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजकर प्रक्रिया को पूर्व की भांति ऑफलाइन ही जारी रखने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य में दस्तावेज पंजीकरण राजस्व का प्रमुख स्रोत है। देहरादून सहित आसपास के क्षेत्रों में प्रतिदिन सैकड़ों दस्तावेज पंजीकृत होते हैं, जिससे हजारों लोगों की आजीविका जुड़ी है। इनमें अधिवक्ता, टाइपिस्ट, स्टांप वेंडर और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। यदि प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया, तो इन लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है। विरोध करने वालों का कहना है कि ऑनलाइन प्रणाली लागू होने से पंजीकरण में गड़बड़ी और धोखाधड़ी की आशंका बढ़ जाएगी। वर्तमान व्यवस्था में उपनिबंधक कार्यालय में पक्षकारों की उपस्थिति, दस्तावेजों का मिलान और सत्यापन होने से पारदर्शिता बनी रहती है। वहीं ऑनलाइन प्रक्रिया में साइबर फ्रॉड और निजी जानकारी के दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ सकता है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि जमीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड अभी पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में सत्यापन के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जहां पहले से ही संसाधनों और कर्मचारियों की कमी बनी रहती है। इससे आम लोगों को और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि दस्तावेजों के पंजीकरण की वर्तमान व्यवस्था को जारी रखा जाए और विवाह व वसीयत जैसे पंजीकरण भी उपनिबंधक कार्यालयों में ही किए जाएं। उनका कहना है कि जल्दबाजी में लिया गया निर्णय न केवल रोजगार प्रभावित करेगा, बल्कि आम जनता के लिए भी समस्याएं बढ़ाएगा।

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