अग्निवीर योजना पर फिर गरमाई सियासत, पूर्व सैन्य भर्ती प्रणाली बहाल करने की मांग तेज

प्रदेश में अग्निवीर योजना को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रदेश चुनाव प्रबंध अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने योजना को देश की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य के लिए खतरा बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग दोहराई है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर लगातार संघर्ष करती रहेगी जब तक पूर्व की भांति सैन्य भर्ती और सेवा व्यवस्था बहाल नहीं की जाती।

डॉ. हरक सिंह रावत ने पुराने सैन्य ढांचे का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले सैनिकों की सेवा अवधि लंबी होती थी और पदोन्नति के आधार पर रिटायरमेंट आयु तय होती थी। सैनिक यदि प्रमोशन पाता था तो उसकी सेवा अवधि बढ़ती थी और अधिकारी स्तर पर लेफ्टिनेंट से लेकर जनरल तक पदोन्नति की स्पष्ट व्यवस्था थी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले ब्रिगेडियर, मेजर जनरल और लेफ्टिनेंट जनरल जैसे पदों पर अधिकारी 55 से 60 वर्ष की आयु तक सेवा देते थे, जिससे सेना को अनुभवी नेतृत्व मिलता था।

उन्होंने उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि पहाड़ी इलाकों में पहले एसएसबी द्वारा महिलाओं को भी बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता था ताकि आपात स्थिति में वे देश की रक्षा में सहयोग कर सकें। उनका कहना था कि सीमावर्ती राज्य होने के कारण उत्तराखंड की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत और दीर्घकालिक सोच पर आधारित होनी चाहिए।

डॉ. हरक सिंह रावत ने आरोप लगाया कि अग्निवीर योजना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और इससे सेना की दीर्घकालिक संरचना प्रभावित होगी। उनके अनुसार, पूर्व की स्थायी भर्ती प्रणाली देश की सुरक्षा के लिहाज से अधिक प्रभावी थी और उसी मॉडल को दोबारा लागू किया जाना चाहिए।

अग्निवीर योजना को लेकर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज होती जा रही है और आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी विमर्श का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

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