गजब : मौत के 11 साल बाद देहरादून की मेयर को आया लोकसभा से निमंत्रण

सरकारी रिकॉर्ड में लापरवाही: मृत व्यक्तियों को निमंत्रण भेजने की घटना

देहरादून : देहरादून की पहली महिला महापौर और उत्तराखंड की पहली निर्वाचित महिला राज्यसभा सांसद स्वर्गीय मनोरमा डोबरियाल शर्मा का निधन 18 फरवरी 2015 को हो चुका था। लेकिन 20 मार्च 2026 को लोकसभा सचिवालय की संयुक्त सचिव ज्योचनामयी सिन्हा के हस्ताक्षर से उनके नाम पर निमंत्रण पत्र पहुंच गया। इस घटना ने पूरे उत्तराखंड में चर्चा का विषय बना दिया है और सरकारी रिकॉर्ड प्रबंधन की लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का पूरा विवरण: 11 साल बाद आया निमंत्रण पत्र
लोकसभा सचिवालय महिला संसदीय सदस्यों के योगदान को दस्तावेजीकृत करने के लिए 1993 की पुरानी पुस्तक का अपडेटेड संस्करण तैयार कर रहा है। इसी क्रम में 20 मार्च 2026 को पूर्व मेयर मनोरमा डोबरियाल शर्मा को पत्र भेजा गया। पत्र में उन्हें “Respected Madam” संबोधित करते हुए महिला नेतृत्व और आधुनिक चुनौतियों पर मूल लेख लिखने के लिए आमंत्रित किया गया था।

पत्र का अंत “With warm regards” से हुआ और हस्ताक्षर ज्योचनामयी सिन्हा के थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पत्र देहरादून के अजबपुर कलां, कुम्हार गली वाले पुराने पते पर भेजा गया, जो 11 साल पहले की जानकारी पर आधारित था

मनोरमा डोबरियाल शर्मा उत्तराखंड की राजनीति में एक अग्रणी महिला नेता थीं। वे देहरादून की पहली महिला महापौर बनीं, उत्तराखंड कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष रहीं और 2014 में निर्वाचित होकर राज्यसभा की पहली महिला सांसद बनीं।

उनके कार्यकाल में देहरादून के विकास, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय मुद्दों पर उन्होंने हमेशा सक्रिय भूमिका निभाई। 59 वर्ष की आयु में 18 फरवरी 2015 को उनका निधन हो गया था। उनकी पुण्यतिथि पर हर साल श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित होती हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उनका नाम अभी भी “सक्रिय” दिखाई दे रहा है।

परिवार की तीखी प्रतिक्रिया: बेटे विवेक शर्मा का व्यंग्यात्मक जवाब
स्व. मनोरमा डोबरियाल शर्मा के बेटे विवेक शर्मा डोबरियाल ने इस घटना पर फेसबुक पर लिखा, “धन्यवाद मोदी सरकार। आपने मेरी मां, जो कि 11 साल पहले इस दुनिया से विदा हो चुकी हैं, उन्हें लोकसभा में एक महत्वपूर्ण परिचर्चा में भाग लेने के लिए निमंत्रण भेज दिया है। मैं मम्मी से निवेदन करूंगा कि वहां पहुंचकर इनकी बुद्धि शुद्धि जरूर करवाएं।”

विवेक शर्मा ने इसे मानवीय भूल तो माना, लेकिन साथ ही लापरवाही भी बताया। परिवार ने साफ कहा कि ऐसी गलतियां न सिर्फ भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं बल्कि सरकारी दफ्तरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती हैं।

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