देहरादून
नकल विरोधी कानून पर कांग्रेस का हमला, प्रीतम सिंह ने सरकार से मांगा जवाब
संसद में सख्त नकल विरोधी कानून पेश होने जा रहा है। इसको लेकर कांग्रेस ने सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि सरकार फिर से नकल विरोधी कानून लाने की बात कर रही है। लेकिन मैं सरकार से पूछना चाहता हूँ कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 में भी नकल विरोधी कानून लाने का दावा किया था। उस समय कहा गया था कि सख्त कानून बनेगा और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगेगी। लेकिन हकीकत क्या रही? कानून बनने के बावजूद पेपर लीक की घटनाएँ लगातार होती रहीं। अब फिर से कड़े कानून की बात की जा रही है। मैं जानना चाहता हूँ कि इस नए कानून में ऐसा क्या अलग है? क्या केवल सजा की अवधि बढ़ा देने से पेपर लीक का संगठित और सुनियोजित कारोबार रुक जाएगा? असली सवाल यह है कि सरकार इसे रोकेगी कैसे?यही स्थिति राज्यों में भी देखने को मिली। राज्य सरकार ने भी कहा कि सख्त नकल विरोधी कानून लाया जाएगा। कानून बना, लेकिन उसके बाद भी पेपर लीक हुए। आखिर इसकी जवाबदेही किसकी है? इसकी जवाबदेही तो सत्ता में बैठे लोगों की है। देश ने यह भी देखा कि जब पेपर लीक के मामले लगातार सामने आए, तब लाखों छात्र-छात्राएँ और बेरोजगार युवा सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए। उन पर लाठीचार्ज हुआ, आँसू गैस के गोले छोड़े गए और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। और जब शिक्षा मंत्री संसद पहुँचे, तो एनडीए के सांसदों ने उनका ऐसा स्वागत किया, मानो उन्होंने कोई बड़ी विजय हासिल कर ली हो। जबकि देश का नौजवान न्याय और जवाबदेही की उम्मीद कर रहा था। मैं कहना चाहता हूँ कि आज देश का नौजवान, छात्र, बेरोजगार और आम नागरिक भारतीय जनता पार्टी के चाल, चरित्र और चेहरे को पहचान चुका है। वह केवल कानूनों के वादे नहीं, बल्कि परिणाम चाहता है। देश का युवा पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था, जवाबदेही और ईमानदार शासन चाहता है, और अब वह बदलाव की अपेक्षा कर रहा है।
