26 साल का इंतजार, 86 दिन का धरना… मुख्यमंत्री जी, अब आपसे ही उम्मीद
26 साल पहले जिन युवाओं ने मेडिकल लैब तकनीशियन बनने का सपना देखा होगा, तब उनकी उम्र शायद 18-20 वर्ष रही होगी। आज उनमें से कई परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं, लेकिन रोजगार का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ।
धरने का आज 86वां दिन है। दो बार मुख्यमंत्री आवास कूच हो चुका है। आखिरकार बेरोजगार मेडिकल लैब तकनीशियनों के प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात हुई।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी चार सूत्रीय मांगें रखीं—IPHS मानकों के अनुरूप पदों का सृजन, सेवा नियमावली बनाकर वर्षवार मेरिट से भर्ती, लंबे समय से भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को आयु सीमा में एकमुश्त छूट और सरकारी लैबों के निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक।
यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का रुख भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक एवं आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब उम्मीद यही है कि यह आश्वासन जल्द ही ठोस निर्णय और कार्रवाई में बदले। क्योंकि सवाल सिर्फ कुछ पदों पर भर्ती का नहीं है। सवाल उन युवाओं का है, जिन्होंने मेडिकल लैब तकनीशियन की पढ़ाई की, डिग्री हासिल की और वर्षों से अपनी योग्यता के अनुरूप रोजगार का इंतजार कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री जी, 26 साल का इंतजार बहुत लंबा होता है। सरकार के सामने एक ऐसा वर्ग है, जो आंदोलन के जरिए अपनी आवाज उठा रहा है, लेकिन साथ ही सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में अपनी योग्यता और अनुभव का उपयोग करने का अवसर भी चाहता है। 86 दिनों के धरने के बाद मुख्यमंत्री से मुलाकात निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है। अब नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है।
उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद इन युवाओं के संघर्ष को कोई ठोस समाधान मिलेगा और 26 वर्षों से चली आ रही प्रतीक्षा का अंत होगा। क्योंकि किसी युवा के जीवन में 26 साल सिर्फ एक आंकड़ा नहीं… एक पूरी जिंदगी होती है।
